22 जून से गंगा का लाल उसकी सुरक्षा और स्वच्छता के लिए अलग से ऐक्ट पास कराने की मांग को लेकर उपवास करते करते गंगा में विलीन होने को तैयार हैं। महान पर्यावरणविद प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) को 111 दिन के उनके आमरण अंशन के बाद कल पुलिस कस्टडी में लिया गया था और आज एम्स में उनकी मृत्यु हो गई।
क्या सरकार एक महान एनवायरमेंटलिस्ट की मौत की जिम्मेदारी लेते हुए उनकी अंतिम ईच्छा को पूरी करेगी या बाक़ी स्वामीयों की तरह इनके बलिदान को भी नज़रंदाज किया जाएगा। 86 वर्षीय प्रोफेसर और पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल करीब गंगा के लिए बेचैन थे। प्रधानमंत्री को भी उन्होंने पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। प्रधानमंत्री को गंगा मां ने 2014 में बुलाया था। अब वह मां को भूल गए हैं। अग्रवाल से पूर्व उनके शिष्य निगमानंद की 112 दिन उपवास के बाद मौत हो गई थी। राम को नहीं बख्शा, गंगा को धोखा दिया। हजारों करोड़ रुपया गंगा साफ करने के नाम पर लूट लिया गया। गंगा मैली की मैली ही रही। अब योगी आदित्यनाथ बार-बार कह रहे हैं कि 15 दिसंबर तक सभी गंदे नाले गंगा में न जाएं, इसका इंतजाम हो जाना चाहिए।

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